
लखनऊ, 10 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में एग्रीगेटर सेवा को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की दिशा में परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक व वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली, 2026 के तहत एम/एस ग्रीन एसएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को प्रदेश में एग्रीगेटर के लिए पहला लाइसेंस जारी किया गया है।
परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर अब तक कुल 5 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 4 आवेदनों को पूर्ण पाया गया है और इन्हें लाइसेंस स्वीकृत करने का निर्णय लिया गया है।
5 लाख फीस और 25 लाख की बैंक गारंटी
मंत्री ने बताया कि ग्रीन एसएम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने निर्धारित 5 लाख रुपये लाइसेंस फीस और 25 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कर दी है। इसके बाद कंपनी को प्रदेश का पहला एग्रीगेटर लाइसेंस जारी किया गया।
सरकार के मुताबिक, इससे उत्तर प्रदेश में निवेश बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। नियमावली का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, किफायती और सुलभ परिवहन सेवा उपलब्ध कराना है।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर
नई व्यवस्था में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। एग्रीगेटर के माध्यम से संचालित वाहनों में लाइव ट्रैकिंग की व्यवस्था होगी। प्रत्येक ऑनबोर्ड ड्राइवर का चरित्र सत्यापन और साइकोलॉजिकल टेस्ट कराया जाएगा। ड्राइवरों को समय-समय पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
यात्रियों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रत्येक एग्रीगेटर को ग्रिवांस रिड्रेसल ऑफिसर (GRO) नियुक्त करना होगा। यात्रियों के लिए इंश्योरेंस की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है।
ड्राइवरों को भी मिलेगा बीमा कवर
नियमावली में ड्राइवरों के कल्याण का भी प्रावधान किया गया है। एग्रीगेटर द्वारा प्रत्येक चालक के लिए 5 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराया जाएगा।
मनमाने किराये पर लगेगी रोक
यात्रियों से मनमाना किराया वसूलने पर भी नियंत्रण रहेगा। डायनेमिक प्राइसिंग के तहत निर्धारित बेस किराये से अधिकतम 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त किराया लिया जा सकेगा।
वहीं, ट्रिप बुक होने के बाद निर्धारित समय तक यात्री को पिकअप नहीं करने पर चालक पर 100 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। यह राशि यात्री को अगली यात्रा में लाभ के रूप में दी जाएगी।
प्रदूषण नियंत्रण और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर जोर
परिवहन विभाग ने वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए भी विशेष प्रावधान किए हैं। खासकर एनसीआर क्षेत्र में संचालित वाहनों की पोर्टल के माध्यम से सतत निगरानी की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
इसके साथ ही एग्रीगेटर की फ्लीट में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर ट्रांजिशन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
सरकार का कहना है कि नियमों और लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने पर संबंधित एग्रीगेटर के खिलाफ पेनाल्टी की कार्रवाई की जाएगी। नई व्यवस्था के जरिए यात्रियों की सुरक्षा, ड्राइवरों का कल्याण और परिवहन सेवाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।






