
UPSIFS में क्राइम सीन मैनेजमेंट के छठे प्रशिक्षण बैच का समापन समारोह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस में वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित विवेचना को और मजबूत करने की दिशा में उ0प्र0 स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS) की महत्वपूर्ण पहल के तहत क्राइम सीन मैनेजमेंट के छठे प्रशिक्षण बैच का समापन समारोह आयोजित किया गया। 03 अगस्त से 11 सितंबर 2026 तक चले छह सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में आरक्षी से निरीक्षक स्तर के 600 से अधिक पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपराध स्थल के वैज्ञानिक प्रबंधन, साक्ष्य संरक्षण एवं संकलन तथा आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
समापन समारोह में पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश श्री राजीव कृष्ण ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित विवेचना प्रभावी पुलिसिंग की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले सभी पुलिसकर्मियों को बधाई देते हुए प्रशिक्षण से प्राप्त Knowledge, Skill और Attitude को फील्ड में प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण और प्रशिक्षण अवसंरचना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के मार्गदर्शन में UPSIFS की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संस्थान ने फॉरेंसिक, लॉ और साइबर के समन्वय से उच्च स्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर पुलिसकर्मियों की वैज्ञानिक विवेचना संबंधी क्षमता को मजबूत आधार प्रदान किया है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों और पूर्व प्रशिक्षण बैचों के प्रयासों से प्रदेश में प्रतिमाह लगभग 5,000 क्राइम सीन्स को वैज्ञानिक तरीके से प्रोटेक्ट कर साक्ष्यों का संकलन, लेबलिंग, पैकेजिंग और एफएसएल तक प्रेषण किया जा रहा है। उन्होंने इसे वैज्ञानिक विवेचना की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि भौतिक एवं वैज्ञानिक साक्ष्य अपराध और अपराधी के बीच संबंध स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे गवाहों पर निर्भरता कम होती है, विवेचना में त्रुटियों की संभावना घटती है और न्याय व्यवस्था के प्रति नागरिकों का विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने UPSIFS के ध्येय वाक्य “Truth, Evidence, Justice” को साकार करने में साक्ष्य की केंद्रीय भूमिका पर बल दिया।
उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि प्रत्येक क्राइम सीन पर केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय ऐसे वैज्ञानिक एवं भौतिक साक्ष्यों का संकलन किया जाए, जो अपराधी तक पहुंचने और न्यायालय में अपराध सिद्ध करने में प्रभावी हों। सीन ऑफ क्राइम की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी, साक्ष्यों की सुरक्षित बरामदगी, लेबलिंग, पैकेजिंग तथा चेन ऑफ कस्टडी का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि आने वाले समय में फील्ड यूनिट को उत्तर प्रदेश पुलिस की सम्मानित एवं अपरिहार्य इकाइयों के रूप में स्थापित करने की जिम्मेदारी प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों के कंधों पर है। उन्होंने निरंतर सीखने, समर्पण, प्रोफेशनलिज्म और परिणाम आधारित कार्यशैली पर जोर दिया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षणार्थी अपने-अपने जनपदों में प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान एवं कौशल को मिशन मोड में लागू करेंगे और अगले 2-3 वर्षों में फील्ड यूनिट की विशिष्ट पहचान स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे विवेचना अधिक वैज्ञानिक, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनेगी।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक ने UPSIFS के फाउंडर डायरेक्टर डॉ. जी.के. गोस्वामी एवं संस्थान के समस्त फैकल्टी का प्रशिक्षण की गुणवत्ता और आधुनिक ज्ञान-कौशल उपलब्ध कराने के लिए आभार व्यक्त किया। प्रशिक्षण में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
संस्थान के फाउंडर डायरेक्टर डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि क्राइम सीन मैनेजमेंट कोर्स को कौशल विकास के रूप में विकसित किया गया है। प्रशिक्षण में केस स्टडी और कृत्रिम न्यायालय जैसे अभिनव प्रयोगों को शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित पुलिसकर्मी विवेचना की मजबूत आधारशिला हैं और उनकी भूमिका दोषियों को सजा दिलाने के साथ-साथ निर्दोष व्यक्तियों को दोषमुक्त कराने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।






