
लखनऊ, 27 जुलाई: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए एक भावपूर्ण संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु ही व्यक्ति को ज्ञान, संस्कार और जीवन की सही दिशा प्रदान करते हैं।
सीएम योगी ने बताया कि गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की स्मृति में मनाई जाती है। बौद्ध परंपरा में यह भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश और धर्मचक्र प्रवर्तन का स्मृति दिवस है, जबकि जैन परंपरा में इसका संबंध गौतम स्वामी की ज्ञान-दीक्षा से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सिख परंपरा में भी गुरु-वाणी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इस प्रकार गुरु पूर्णिमा सभी परंपराओं में गुरु, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक पर्व है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की गुरु-शिष्य परंपरा हमारी सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। भगवान श्रीराम ने गुरु वशिष्ठ से और भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण कर आदर्श स्थापित किए। उन्होंने कहा कि जहां गुरु का सम्मान होता है, वहीं समाज और राष्ट्र निरंतर प्रगति करते हैं।
सीएम योगी ने अपनी सरकार के पिछले नौ वर्षों के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षकों के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के माध्यम से लगभग 60 लाख शिक्षक, शिक्षेतर कर्मचारी और उनके आश्रित परिवारजन लाभान्वित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि इस योजना का दायरा बढ़ाते हुए उच्च शिक्षा विभाग, राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त तथा स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के 7.30 लाख से अधिक शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारों को भी इसमें शामिल किया गया है। साथ ही, जल्द ही ढाई लाख से अधिक कर्मचारियों और उनके आश्रितों को भी इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त शिक्षकों और शिक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा बीमा कवर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन को दिशा भी प्रदान करते हैं। गुरु स्वयं ज्ञान का प्रकाश हैं, जो शिष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर सत्य, संस्कार और उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने गुरुजनों के उपदेशों और आदर्शों को जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि यही व्यक्तिगत विकास, सशक्त समाज और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का सबसे मजबूत आधार बनेगा।






