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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम, 2025 ग्रामीण विकास को सहभागी, समावेशी और आवश्यकता-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इसके अंतर्गत विकास कार्य केवल केंद्र स्तर से निर्धारित नहीं होंगे, बल्कि ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत की सक्रिय सहभागिता से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का चयन और निर्धारण किया जाएगा।

गांव की जरूरतों, प्राथमिकताओं और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर तैयार की जाने वाली विकास योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामकारी बदलाव सुनिश्चित करेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, आजीविका, आधारभूत सुविधाओं और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को नई गति मिलेगी।

विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन( वीबी – जीरामजी )अधिनियम 1 जुलाई से लागू हो जाएगा। नए अधिनियम में एक नया ढांचा होगा, जो ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का वैधानिक मजदूरी वाले रोजगार की गारंटी देता है। उपमुख्यमंत्री ने इसे ग्रामीण विकास संरचना में ऐतिहासिक परिवर्तन बताया है। उन्होंने बताया कि नये अधिनियम के तहत हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन के गारंटीकृत मजदूरी रोजगार का अधिकार मिलेगा। यह मनरेगा के तहत 100 दिन है। इसमें कामों की चार श्रेणियां हैं,-जल सुरक्षा परियोजनाएं, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से संबंधित बुनियादी ढांचा और मौसम की अत्यधिक मार से बचाव के काम।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा से नए ढांचे में बदलाव की वजह से श्रमिकों को कोई परेशानी नहीं होगी। मौजूदा मनरेगा कार्य जारी रहेंगे, उन्हें नए ढांचे में स्थानांतरित कर दिया जाएगा। मौजूदा जॉब कार्ड उनके लिए अस्थाई रूप से मान्य रहेंगे, जिनका ई – केवाईसी पहले ही पूरा हो चुका है। लंबित ई- केवाईसी के कारण श्रमिकों को रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा।

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