
तीन दशक से अधिक की सेवा के बाद मिली ऐतिहासिक उपलब्धि, Assistant Chief of the Air Staff (Education) का संभाला पद
नई दिल्ली, 1 सितंबर 2026। भारतीय वायुसेना की वरिष्ठ अधिकारी एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा ने भारतीय रक्षा सेवाओं में एक नया इतिहास रच दिया है। 1 सितंबर 2026 को उन्होंने एयर वाइस मार्शल का पदभार संभाला। इसके साथ ही वह भारतीय रक्षा सेवाओं में एयर वाइस मार्शल या समकक्ष रैंक हासिल करने वाली पहली महिला गैर-चिकित्सकीय अधिकारी बन गई हैं।
✈️ नई जिम्मेदारी भी संभाली
एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा ने Assistant Chief of the Air Staff (Education) का महत्वपूर्ण पद संभाला है। इस जिम्मेदारी के साथ वह भारतीय वायुसेना में शिक्षा और पेशेवर प्रशिक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगी।
👩✈️ महिला अधिकारियों के लिए ऐतिहासिक पड़ाव
शक्ति शर्मा की पदोन्नति भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका और नेतृत्व क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। गैर-चिकित्सकीय क्षेत्र से इस वरिष्ठ रैंक तक पहुंचना महिला अधिकारियों के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।
यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय रक्षा सेवाओं में महिलाएं विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए नेतृत्व के उच्च पदों तक पहुंच रही हैं।
🏅 तीन दशकों से अधिक की गौरवपूर्ण सेवा
एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा का सैन्य करियर तीन दशकों से अधिक की विशिष्ट सेवा से जुड़ा रहा है। लंबे अनुभव और समर्पण के बाद हासिल की गई यह उपलब्धि उनके पेशेवर सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
उनकी यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश भी देती है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर मेहनत के जरिए नई ऊंचाइयों को हासिल किया जा सकता है।
🌟 नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
शक्ति शर्मा की ऐतिहासिक उपलब्धि विशेष रूप से उन युवा महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होकर देश की सेवा करने का सपना देखती हैं।
एयर वाइस मार्शल के पद तक उनका पहुंचना भारतीय वायुसेना में महिलाओं की बदलती भूमिका को दर्शाता है और “Touch the Sky with Glory” के गौरवपूर्ण आदर्श को नई प्रेरणा देता है।
🇮🇳 इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ नाम
एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा की उपलब्धि केवल एक पदोन्नति नहीं, बल्कि भारतीय रक्षा सेवाओं में महिला नेतृत्व के सफर का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को भारतीय वायुसेना में नए सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी।






