
विश्व सेप्सिस दिवस पर KGMU का संदेश: ‘सेप्सिस में निवेश करें–जानें बचाएं’
लखनऊ, 11 सितंबर 2026। सेप्सिस जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा इसके बेहतर प्रबंधन को लेकर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) का पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग व्यापक स्तर पर अभियान चला रहा है। 13 सितंबर को विश्व सेप्सिस दिवस के अवसर पर इस वर्ष ‘सेप्सिस में निवेश करें–जानें बचाएं’ (Invest in Sepsis – Save Lives) थीम के साथ लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को समय रहते बीमारी की पहचान और उपचार के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि सेप्सिस में हर मिनट मायने रखता है। संक्रमण के गंभीर रूप लेने से पहले उसके संकेतों को पहचानकर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है। सही एंटीबायोटिक, सही डोज और सही समय पर उपचार मरीज की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।
एंटीबायोटिक्स के अंधाधुंध इस्तेमाल पर चेतावनी
चिकित्सकों ने एंटीबायोटिक्स के अनावश्यक एवं गलत इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। विशेषज्ञों के मुताबिक दवा-प्रतिरोधी संक्रमण (Drug-Resistant Infection) तेजी से बढ़ती वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती है। एंटीबायोटिक्स के अनुचित इस्तेमाल से संक्रमण के इलाज में कठिनाई बढ़ती है और गंभीर मामलों में सेप्सिस का खतरा भी बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य व्यवस्था में एंटीबायोटिक्स के विवेकपूर्ण इस्तेमाल, संक्रमण की समय पर पहचान और प्रभावी उपचार के लिए राज्य स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
12-13 सितंबर को ‘सेप्सिस अपडेट 2026’ में होगा मंथन
विश्व सेप्सिस दिवस के अवसर पर KGMU के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग द्वारा 12 और 13 सितंबर को ‘सेप्सिस अपडेट 2026’ नाम से दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही है। इसमें देश-विदेश से विशेषज्ञ शामिल होकर सेप्सिस की रोकथाम, शुरुआती पहचान, आधुनिक उपचार पद्धतियों, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और क्रिटिकल केयर से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे।
उद्घाटन समारोह में अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य डॉ. अमित कुमार घोष, एनएचएम की निदेशक डॉ. पिंकी जोएल तथा डीजीएमई श्रीमती नेहा शर्मा सहित प्रमुख अधिकारी एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे। कार्यक्रम का आयोजन 12 सितंबर को सुबह 10 बजे, अष्टम तल, शताब्दी फेज-2, KGMU, लखनऊ में होगा।
हर साल करोड़ों लोग होते हैं प्रभावित
विशेषज्ञों के अनुसार सेप्सिस संक्रमण के प्रति शरीर की अनियंत्रित प्रतिक्रिया से उत्पन्न होने वाली गंभीर चिकित्सकीय स्थिति है। समय पर उपचार न मिलने पर यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकती है और गंभीर अवस्था में सेप्टिक शॉक तक पहुंच सकती है।
इसके प्रमुख संकेतों में बुखार या शरीर का तापमान कम होना, तेज सांस चलना, हृदय गति बढ़ना, सांस लेने में कठिनाई, निम्न रक्तचाप, भ्रम या मानसिक स्थिति में बदलाव और पेशाब की मात्रा कम होना शामिल हैं।
भारत में भी सेप्सिस का बोझ गंभीर चिंता का विषय है। उपलब्ध अध्ययनों के अनुसार देश में बड़ी संख्या में मरीज सेप्सिस से प्रभावित होते हैं और ICU में भर्ती मरीजों में इसका अनुपात भी काफी अधिक पाया गया है। इसके साथ ही मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण चुनौती को और गंभीर बना रहे हैं।
KGMU में 26 बेड की अत्याधुनिक रेस्पिरेटरी ICU
KGMU का पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग सेप्सिस और गंभीर श्वसन रोगों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विभाग में 26 बेड की रेस्पिरेटरी ICU उपलब्ध है। विभाग के अनुसार यहां वेंटिलेटर-एसोसिएटेड निमोनिया (VAP) की दर 10 प्रतिशत से कम है और करीब 85 प्रतिशत मरीजों के सफल उपचार का उल्लेखनीय परिणाम हासिल किया गया है।
विशेषज्ञों ने साझा किए उपचार के अनुभव
विश्व सेप्सिस दिवस के अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रो. (डॉ.) वेद प्रकाश, विभागाध्यक्ष, पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन; प्रो. (डॉ.) सूर्यकान्त, विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन; प्रो. (डॉ.) अपुल गोयल, यूरोलॉजी विभाग तथा डॉ. सौमित्र मिश्रा, क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों ने कहा कि सेप्सिस के खिलाफ प्रभावी लड़ाई के लिए रोकथाम, शीघ्र पहचान, समय पर उपचार, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान में निवेश जरूरी है।
इस अवसर पर डॉ. सचिन कुमार, डॉ. मोहम्मद आरिफ, डॉ. अनुराग, डॉ. ऋचा त्यागी, डॉ. यश जगधारी, डॉ. दीपक, डॉ. नंदिनी दीक्षित, डॉ. सुभ्रा, डॉ. संदीप, डॉ. अपर्णा, डॉ. हर्षिता सहित चिकित्सक एवं अन्य स्टाफ मौजूद रहे।






