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लखनऊ, 22 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन को नई दिशा देने के उद्देश्य से मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में उपचारित (Treated) जल के सुरक्षित पुनः उपयोग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान उपचारित जल के अधिकतम उपयोग, विभागीय समन्वय और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अपनी उपविधियों (By-laws) में आवश्यक संशोधन कर उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग से संबंधित प्रावधानों को शामिल करें। साथ ही प्रत्येक विभाग अपनी अलग पुनः उपयोग कार्ययोजना तैयार करे। उन्होंने राज्यभर के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और उपचारित जल की मांग वाले केंद्रों का GIS आधारित मैपिंग कराने पर भी विशेष जोर दिया, ताकि जल आपूर्ति और उपयोग की बेहतर योजना बनाई जा सके।

मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) से राज्य के सभी 17 नगर निगमों के लिए शहर स्तर पर पुनः उपयोग कार्ययोजना तैयार करने का अनुरोध किया। उन्होंने संबंधित विभागों को इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव भेजने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से एसटीपी डिस्चार्ज मानकों पर आवश्यक स्पष्टीकरण प्राप्त करने का सुझाव दिया गया।

बैठक में राज्य स्तर पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति सह मूल्य निर्धारण समिति, तकनीकी समिति, जिला स्तरीय पुनः उपयोग समितियाँ और विवाद समाधान समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही एनएमसीजी की मदद से एसटीपी संचालकों और उपचारित जल का उपयोग करने वाली संस्थाओं के बीच सर्विस लेवल एग्रीमेंट (SLA) तैयार करने पर भी सहमति बनी।

मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि जल शक्ति मंत्रालय अन्य केंद्रीय मंत्रालयों जैसे रेलवे, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, कृषि, विमानन, ऊर्जा और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भी उपचारित जल को द्वितीयक उपयोग के लिए अपनाने के निर्देश जारी करे। उनका कहना था कि यदि उपचारित जल की गुणवत्ता और मात्रा दोनों की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित होगी, तो विभिन्न विभागों और उद्योगों का भरोसा बढ़ेगा तथा इसके व्यापक उपयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि उपचारित जल के पुनः उपयोग से जुड़े कार्यों की नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। विभागों के बीच बेहतर समन्वय, समयबद्ध अनुपालन और प्रभावी मॉनिटरिंग पर विशेष बल दिया गया, ताकि नीति के अपेक्षित परिणाम समय पर हासिल किए जा सकें।

बैठक के दौरान कई सफल उदाहरण भी प्रस्तुत किए गए। पनकी ताप विद्युत केंद्र, मथुरा आईओसीएल रिफाइनरी और गाजियाबाद की औद्योगिक इकाइयों द्वारा उपचारित जल के सफल उपयोग की जानकारी साझा की गई। नोएडा प्राधिकरण ने बताया कि क्षेत्र में उपलब्ध 260 एमएलडी उपचारित जल में से 120 एमएलडी का पुनः उपयोग किया जा रहा है, जबकि 140 एमएलडी जल हिंडन नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे नदी की पारिस्थितिकी को मजबूती मिल रही है। साथ ही दादरी ताप विद्युत केंद्र द्वारा 80 एमएलडी जल उपयोग की संभावना भी जताई गई, जिससे नोएडा को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने मथुरा-वृंदावन के 13 एमएलडी एसटीपी से उपचारित जल के पुनः उपयोग हेतु अधोसंरचना विस्तार को मंजूरी दी है। इससे यमुना नदी के तटवर्ती जलाशयों का पुनर्भरण कर नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

बैठक में पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क से जुड़ी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। लखनऊ में 39 एमएलडी दौलतगंज एसटीपी से 22.5 एमएलडी उपचारित जल उपलब्ध कराने हेतु अधोसंरचना निर्माण तेजी से चल रहा है। वहीं वाराणसी में 50 एमएलडी रमना एसटीपी से 10 एमएलडी उपचारित जल टेक्सटाइल पार्क को उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।

रेलवे परियोजनाओं के तहत प्रयागराज जंक्शन के लिए राजापुर एसटीपी से 2 एमएलडी तथा रेलगांव और सुबेदारगंज स्टेशनों के लिए कोदरा एसटीपी से 2 एमएलडी गैर-पेयजल उपलब्ध कराने के प्रस्ताव एनएमसीजी को भेजे गए हैं। इसके अलावा वाराणसी, आगरा और प्रयागराज की शहर स्तरीय पुनः उपयोग कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत की गईं, जबकि कानपुर नगर की योजना तैयार की जा रही है।

एनएमसीजी के उप महानिदेशक ने बताया कि गंगा पल्स पोर्टल के माध्यम से राज्य के एसटीपी की वास्तविक समय में निगरानी की जा रही है। इस पोर्टल पर उपचारित जल की गुणवत्ता का डेटा प्रत्येक 10 मिनट में उपलब्ध होता है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर जल आपूर्ति जारी रखने या रोकने का तत्काल निर्णय लिया जा सकता है।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि अब सभी नए एसटीपी की डीपीआर में उपचारित जल के पुनः उपयोग की अधोसंरचना और संभावित उपयोगकर्ताओं को अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है। इन परियोजनाओं को अनुमोदन और वित्तपोषण के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को भेजा जा रहा है। बैठक में नगर विकास, सिंचाई, उद्योग, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, जल निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नमामि गंगे और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

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